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दिवाली में गरीब,वंचितों के वाली बनकर उनके भी घरों को करे रौशन

भंडारा: भारतीय समाज में दिवाली आनंद,उत्साह व समृद्धि का प्रतीक है.
भंडारा में लाला लाजपतराय वार्ड(सुभाष गार्डन के सामने) में श्रीराम कावळे नामक वृध्द,दोनो पैरो से विकलांग होकर एक अपनी छोटी सी लॉन्ड्री में कपड़े प्रेस कर अपना जीवन निर्वाह करते है,अक्सर उनके पास प्रेस के कपड़े देना होता है,अचानक धनतेरस के दिन उनका 11वर्षीय छोटा बेटा जो विकलांग है, रोता हुआ कुर्सी पर बैठा हुआ दिखाई दिया,पूछने पर पिता ने बताया की वो फटाके लाकर देने की जिद कर रहा है,मैं भी विकलांग हूं,कल  लाकर देता हूं कहा फिर भी नही मान रहा,उसकी आंखों से बह रही अश्रुधारा देखी नही गई दसरा मैदान में लगी फटाके की दुकान से लाकर कुछ छोटे फटाके,अनार,फुलझड़ी तथा मिष्टान्न लाकर उसे दिए तो वह बहुत खुश हुआ,उसकी आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान देख     सचमुच यही सार्थक दिवाली है,ऐसा मुझे महसूस हुआ,उसके पिता के साथ ही मेरे भी दिल को अतीव आनंद और दिली सुकून मिला.ऐसा ग्रीन हेरिटेज के मो सईद शेख ने बताया.उसका बड़ा भाई 15 वर्षीय ऋषभ 12. वी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है, वो कही काम पर जाता है,रात को 11बजे घर लौटता है, मां ललिता  भी खाना पकाने के काम पर जाती है,एक छोटा सा घर 2 लाख का लोन लेकर बनाया ,जिसकी महीने की किश्त 7हजार रुपए भरना होता है,विकलांग बच्चे के इलाज में 1 लाख से ज्यादा खर्च आ गया. अब आगे नहीं कर सकता,बच्चे  का स्कूल जाना भी बंद हो गया है,उसको खाना खिलाना,नहलाना, संडास_बाथ_रूम लेजाना पड़ता है,एक बड़ी परेशानी में जी रहे है हम, ऐसा उसके पिता श्रीराम जी ने बताया।इसलिए हमारे आसपास ऐसे कुछ और भी मजबूर,लाचार लोग होंगे जिनको अपनी मदत की सख्त जरूरत भी है,दिवाली का मतलब ही होता है खुशियां पहुंचाना, दिवाली में कही धन बरसते है तो कहीं आंसू, उन आंसुओं को पोंछकर उनके घरों को भी रोशन करके उन चेहरों पर मुस्कान और चमक लाने का काम हम सब मिलकर करे तो इससे बड़ा और कोई पुण्य का कार्य नही,क्योंकि गरीब के चेहरे की मुस्कान से जो आनंद और दिली सुकून मिलता है वह अपने आप में उपरवाले की नेमत रहती है,इसलिए दिवाली में बने गरीबों के वाली,ऐसा दीपावली के शुभ पर्व पर शेख ने अपने विचार प्रकट किए तथा पर्यावरण युक्त ,प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का आह्वान किया।