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हिंदू धर्म इंसानियत का दुश्मन ,,,, चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ,,,,,,,


सुप्रीम कोर्ट , एडवोकेट चेतन बैरवा का कहना है कि हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं बल्कि यह इंसानियत का दुश्मन है क्योंकि यह धर्म मनु स्मृति से चलता है जिसमें लिखा हुआ है कि महिलाएं जन्म से ही चरित्र हीन होती हैं , उन्हें कभी स्वतंत्र नहीं छोड़ा जाना चाहिए ।

मनु स्मृति में यह भी लिखा हुआ है कि शूद्रों को ( यानि कि आज के एससी एसटी ओबीसी के लोगो को , यानि कि भंगी चमारों को , मीणा जाती के लोगो को , गुर्जर , जाट  , यादव , अहीर , खाती , कुम्हार , नाई , तेली , माली , सुनार जाती के लोगो को ) शिक्षा और संपति अर्जित करने का कोई अधिकार नहीं । उन्हें नए वस्त्र पहनने का कोई अधिकार नहीं है । उन्हें पक्के मकानों में रहने और नए बर्तनों में खाना खाने का कोई अधिकार नहीं है । 

मनु स्मृति में यह भी लिखा हुआ है कि सो साल के क्षत्रिय को भी दस साल के ब्राह्मण के बच्चे को अपने बाप के बराबर मानना होगा । क्यों मानना होगा कोई कारण नहीं । इसमें यह भी लिखा हुआ है कि वैश्यों और शूद्रों को राजकाज से दूर ही रखा जाना चाहिए वरना समाज में अराजकता फैलने का डर रहता है । क्यों रखा जाना चाहिए कोई कारण नहीं ।यानि कि मनु स्मृति वैश्यों तथा शूद्रों को अराजकता का पर्याय मानती है । 

मनु स्मृति के चैप्टर 1 के श्लोक 33 में यह भी लिखा हुआ है कि संसार की वृद्धि करने के लिए ब्रह्मा ने अपने मुख से ब्राह्मण को , भुजाओं से क्षत्रियों को , पेट से वैश्यों को तथा पैर से शूद्रों को पैदा किया है । यानि कि आज के गुर्जर , जाट , यादव , माली , तेली , नाई , खाती , कुम्हार , सुनार , ये सब ब्रह्मा के पैर से पैदा किए हुए लोग हैं । परन्तु यह निहायत एक हास्यास्पद बात है क्योंकि दुनिया में कहीं भी , कोई इंसान पैर से पैदा नहीं होता । मेडिकल साइंस भी इस बात को शिरे से खारिज करती है । 

डॉक्टर सुरेंद्र नाथ सक्सेना द्वारा लिखित तथा मनोज पब्लिकेशन ( 1583 - 1584 , चांदनी चौक , दिल्ली - 110006 , फोन 011 - 23262174 , 23268216 , मो 9818753569 ) द्वारा प्रकाशित , मनु स्मृति के चैप्टर 1 के श्लोक 97 के पेज 32 पर यह साफ लिखा हुआ है कि पृथ्वी आदि पांच महाभूतों में प्राणधारी जीव ही श्रेष्ठ होते हैं तथा प्राणियों में भी वो श्रेष्ठ होते हैं जो बुद्धि से काम लेते हैं । और बुद्धि से काम लेने वालों में भी मनुष्य श्रेष्ठ होते हैं और मनुष्यों में भी केवल ब्राह्मण ही श्रेष्ठ होते हैं । तो मनु स्मृति में लिखी हुई ये बातें भी सरासर आधारहीन तथा मूर्खतापूर्ण है । ब्राह्मण होते कौन हैं अपने आपको श्रेष्ठता का सर्टिफिकेट देने वाले । यह तो कानून की भाषा में भी  " Violation of Natural Justice "  है जिसका इस्तेमाल हम वकील लोग दिन रात कोर्टों में किया करते हैं । 

अफसोस कि बात यह है कि ब्राह्मणों ने आज दिन तक इन गलत बातों का ना कभी कोई विरोध किया और ना पश्चाताप किया और ना सुधारने का प्रयास किया । क्योंकि उन्हें इन बातो से उन्हें मुफ्त में सम्मान मिल जाता है , मुफ्त में तमाम प्रकार की भौतिक सुख सुविधाएं मिल जाती हैं । ब्राह्मणों ने तो बल्कि इन बातो का खुल्लम खुल्ला समर्थन किया है । इटावा वाली घटनाएं इसीलिए तो हो जाती हैं जिसमें ब्राह्मणों ने यादव कथा वाचकों पर ब्राह्मण महिला का पिसाब छिड़ककर उनके शुद्धि कारण का कार्य किया गया । 

इन सबसे भी ज्यादा अफसोस कि बात यह है कि आरएसएस तथा बीजेपी मनु स्मृति आधारित देश चाहती है । वह भारत में फिर से मनुस्मृति आधारित सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक व्यवस्था चाहती है , जिन्हें एससी एसटी ओबीसी के लोगो को समझना चाहिए तथा बीजेपी के खिलाफ वोट देकर उनका विरोध करना चाहिए । लेकिन एससी एसटी ओबीसी के मूर्ख लोग इन गंभीर बातों को समझ ही नहीं पा रहे हैं । बल्कि वो तो हिंदू राष्ट्र के नाम पर बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं । उन्हें इस बात का होश ही नहीं कि हिंदू राष्ट्र बन जाने पर उन लोगों पर मनु स्मृति फिर से लागू हो जाएगी । हिंदू राष्ट्र बनते ही उन्हें फिर से उन्हीं दिनों को भुगतने के लिए तैयार रहना  पड़ेगा , जिन्हें उनके बाप दादाओ ने संविधान लागू होने से पहले भुगता है । हिंदू राष्ट्र बनते ही उनके सारे अधिकार छीन लिए जायेंगे जो उन्हें आज भारत का संविधान उन्हें दे रहा है । 

मनु स्मृति को ब्राह्मण लोग वेदानुकूल भी बताते हैं । एक श्लोक में ब्राह्मण कहते हैं कि  " मनुस्मृति विरुद्धा या सा स्मृतिनं  प्रशस्यते , वेदार्थोपनिब  ....  ही मनो स्मृति "  अर्थात मनु स्मृति वेदानुकूल है । इस प्रकार वेद भी मनु स्मृति का ही समर्थन करते हैं । इस हिसाब से वेद भी एससी एसटी ओबीसी के लोगो के खिलाफ ही हैं । 

बाबा साहब अम्बेडकर ने भी 1956 में हिंदू धर्म इसीलिए छोड़ा था क्योंकि यह धर्म मनुस्मृति आधरित धर्म है और मनु स्मृति एससी एसटी ओबीसी की विरोधी होने के कारण इंसानियत की दुश्मन है । इसलिए एससी एसटी ओबीसी के लोगो को भी इस धर्म को इंसानियत का दुश्मन मानकर इस धर्म को त्याग देना चाहिए । 

चेतन बैरवा , एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट , मो 85 11 31 63 41 , 16 जुलाई 2025 , फेस बुक