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अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा रायपुरा नंबर दो गांव


तालाब पर पसरा अतिक्रमण  एक दूसरे की मिली भगत से खाया जा रहा  विकास का पैसा 

भीम प्रकाश बौद्ध उप संपादक मध्य प्रदेश 

भिंड :-जिले से 90 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम रायपुरा नंबर दो गांव है  जहां पर विकास के नाम पर पैसा खाया जाता है गांव में बरसों पुराना एक प्राचीन तालाब है जो कि अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है  कई पंचवर्षीय योजना निकल गई लेकिन विकास एक भी सरपंच ने नहीं किया है जबकि वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के मुखिया मनमोहन सिंह यादव जी ने मुख्यमंत्री महोदय जी ने आदेश भी दे रखा है की तालाब की स्थिति सुधारी जाए लेकिन सरकार करोड़ों रुपया विकास के लिए भेजती है आखिर वह  पैसा कहां चला जाता है  लेकिन तालाब की स्थिति बिल्कुल भी नहीं बदली है चारों तरफ से अतिक्रमणकारियों ने अपना कब्जा जमा लिया और अपने घर जमा लिए हैं जिस वजह से तालाब का पानी बस्तियों में भर गया है और कई घर धराशाई होने की कगार पर पहुंच गए हैं लेकिन वरिष्ठ अधिकारी बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं जिस वजह से गांव में कीड़े मकोड़े का डर हमेशा बना रहता है फिर भी गांव के सरपंच को बिल्कुल भी ध्यान नहीं है वही सेक्रेटरी भी कभी कभार आना होता है जिस वजह से विकास नहीं हो पा रहा है चारों तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है नल जल योजना अधूरी पड़ी हुई है कागजों में विकास दर्शा दिया जाता है विकास होता नहीं है गांव में गंदगी का बोल वाला है जगह-जगह गंदगी पड़ी हुई है कई लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है जिस वजह से गरीब अपनी बदहाली पर रो रहा है सरकार अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित तो कर रही है लेकिन वह योजना गरीबों तक नहीं पहुंच पा रही है योजनाएं उन व्यक्तियों को दी जाती हैं जो पैसे देता है यदि वह पैसे देने में असमर्थ होता है तो उसका आवास कैंसिल कर दिया जाता है इस प्रकार की व्यवस्था से गरीब व्यक्ति परेशान हो चुका है जबकि सरपंच का फर्ज बनता है  गांव के लोगों को इकट्ठा करें और उन गरीबों को योजनाएं बताएं जो इसे वंचित है या  जिनको  कई वर्षों से योजनाएं नहीं मिली है उनको योजना का फायदा दिलवाया जाए गांव के लोगों ने सीएम हेल्पलाइन पर  शिकायत दर्ज करवाई लेकिन विकासखंड लहार से जनपद पंचायत में शिकायत जाती हैं तो वहीं से कट दी जाती हैं जिससे दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है क्योंकि उन अधिकारियों के द्वारा झूठ लिखे दिया जाता है  ग्रामीण ने जो शिकायत की है वह झूठ बोलता है उसने अपनी शिकायत वापस ले ली है जबकि जब शिकायतकर्ता से पूछा जाता है तो वह कहता है हमसे पता ही नहीं चला कब शिकायत  कट गई इस प्रकार की व्यवस्था से शिकायतकर्ता भी परेशान हो जाता है और वह थक हार कर रह जाता है इस प्रकार की व्यवस्था संचालित हो रही है क्योंकि जनपद पंचायत में जो को  वरिष्ठ अधिकारी बैठता है वह रिश्वत सरपंच और सेक्रेटरी से पहले से ही ले बैठता है जिस वजह से दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण पैसे का बोलबाला है जिस वजह से विकास की व्यवस्था खराब हो चुकी है यह गांव विकास के लिए छटपटा रहा है की कब हमारा विकास होगा लेकिन कई वर्ष बीत गए आज तक विकास के नाम पर सिर्फ पैसा खाया जाता है और सारा पैसा ढाकार लिया जाता है  अब देखते हैं विकास कब तक होता है  

 इनका कहना है 
लोगों ने तालाब पर अतिक्रमण कर लिया है  जिस वजह से तालाब का गंदा पानी हमारे दरवाजे तक आ रहा है 
बृजराज रायपुरा ग्रामीण