चुनाव आयोग के वकील मनिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि यह निर्णय 2019 से लागू है और सभी राजनीतिक दलों से विमर्श के बाद लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से मतदाताओं को कोई परेशानी नहीं होगी, और यह प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। सिंह ने यह भी कहा कि ईवीएम के बारे में जो आरोप लगते रहते हैं, वे पहले से ही ज्ञात हैं और इस मुद्दे को चुनाव आयोग पूरी तरह से देखता है।सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने से उन्हें कोई परेशानी या हतोत्साहन नहीं होगा। कोर्ट ने आयोग को तीन सप्ताह का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2025 को तय की है, जब आयोग को हलफनामा दाखिल करना होगा।
यह मामला चुनाव प्रक्रिया में सुधार और मतदाताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ज्यादा संख्या में मतदाता होने के बावजूद मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके।
विधानसभा चुनाव के बाद फिर उठा ईवीएम का मुद्दा
हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद ईवीएम का मुद्दा एक बार फिर से गरमाया हुआ है. हरियाणा में कांग्रेस पार्टी ने कई ईवीएम की बैटरी को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने सभी सवालों का जवाब देते हुए आरोपों को खारिज कर दिया.
इसके बाद अब महाराष्ट्र चुनाव में भी विपक्षी दल ईवीएम को लेकर लामबंद हैं. विपक्षी दलों का कहना है कि कुछ सीटों पर वोट प्रतिशत में गड़बड़ी की संभावना है. इसके लिए विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराया है.



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