भीम प्रकाश बौद्ध उपसंपादक
आज दुनिया भर में यह देखने को मिल जाता हैl की जाति के नाम पर लोगों से भेदभाव किया जाता हैl छोटी जाति के नाम पर बड़े जाति के द्वारा अत्याचार किया जाता हैl क्या यह उचित हैl इसमें कई महान लोगों ने अपनी प्रक्रिया भी दिए हैं lवहीं भारतीय संविधान में बाबा भीमराव अंबेडकर ने संविधान में अंकित किया हैl की सब लोग बराबर हैl फिर कानून के दायरे में कोई नहीं चल रहा हैl आज भी जातिवाद की प्रथा बदस्तूर जारी हैl बड़े-बड़े मंदिरों पर दलितों को मंदिरों में घुसने नहीं दिया जाता हैl आखिर ऐसा क्यों पूजा पंडित ही क्यों करता हैl मंदिर में दलित मंदिर में पूजा पुजारी क्यों नहीं बनता है यह एक सवाल हैl उच्च वर्ग छोटे वर्ग पर आज भी अन्य अत्याचार कर रहा है lआज भी कई ऐसे मंदिर हैl जहां पर छोटी जाति वाले लोगों को अंदर घुसना माना हैl दलित समाज का कोई युवा यदि घोड़ी पर बैठता है lतो उसको उतार दिया जाता हैl क्या यह जातिवाद नहीं है lतकनीकी युग में हम प्रवेश करें हैं lमशीन योग हैl विज्ञान योग हैl फिर भी हम संकीर्ण सोच से आज भी हमारा समाज उभर नहीं पा रहा है l समाज के पढ़े-लिखे लोग हैं lजो चंद लोग हैंl वह बहुत दम भरते हैंl कि हम पढ़े लिखे हैं lक्या इसे पढ़े लिखे लोग कहते हैंl जो हम जातिवाद के नाम पर लड़ाई झगड़ा करने पर आमदा है lलड़की को दूसरी जाति के लड़के के साथ प्रेम करती थी और उससे शादी भी करना चाहती थीl लेकिन उसके घर वालों ने उसे देख लिया और लड़की को मौत के घाट उतार दिया दिल्ली के प्रेम नगर इलाके में एक व्यक्ति को इस बात पर आपत्ति थी कि उसकी बेटी किसी अन्य जाति के लड़के से विवाह करें उसने उसने योजना वध तरीके से बेटी की हत्या कर दी आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया हैl इस घटना से फिर यह सवाल उठता हैl कि देश के विकास के मोर्चे पर सामाजिक मसलों की प्राथमिकता क्या हैl और उसमें सुधार के लिए क्या किया जा सकता हैl सुधार किया जा रहा है lझूठे सम्मान के नाम पर की गई हत्या यह कोई अकेली घटना नहीं हैl देश के अलग-अलग इलाकों में अक्सर ऐसी घटना सामने आती रहती हैंl जिनमें किसी प्रेमी जोड़े को उनके परिवार वालों ने मार डाला क्योंकि लड़की और लड़का की जाती अलग थी इसे विडंबना ही कहा जा सकता हैl की बहुत सारे लोग आधुनिकता और तकनीकी विकास के मामलों में खुद को मुख्य धारा में शामिल दिखाना चाहते हैंl मगर हमारे समाज में कई ऐसे लोग हैंl जो एक निश्चित किस्म की संकीर्ण सोच में उलझे हुए हैं l रास्ता उन्हें दिखाई नहीं दे रहा हैl दुनिया की कोई भी संस्कृति प्रेम के विरुद्ध नहीं हैl और ना किसी व्यक्ति को जाति के नाम झूठ और सम्मान के नाम पर हत्या करने की शिक्षा देती हैl भारतीय संविधान बराबरी का दर्जा देता हैl मगर अफसोस जनक हैl कि अनपढ़ से लेकर कई पढ़े लिखे लोग भी जाति के बंधन में बंधे हुए हैंl जिससे वह निकल ही नहीं पा रहे हैंl पढ़ने लिखने का मतलब होता हैl अच्छा और बुरा क्या होता हैl उसे निकालना जबकि जब पढ़ा लिखा वर्ग होता हैl वह अंधविश्वास और जातिवाद के नाम पर कभी नहीं लड़ता है lऔर जो संकीर्ण सोच के हैंl कि हम ठाकुर हैंl हम शर्मा हैं lहम बड़ी जाति के हैंl आदि के नाम पर लड़ते रहते हैं lयदि हम आपस में लड़ते रहे तो शायद हमें इस देश की उन्नति से पीछे रह जाएंगे यदि हम जातिवाद के चक्कर में पड़े रहे तो हम अपना देश को महान कभी नहीं बना सकते हैं l इसलिए जातिवाद कुछ नहीं है lइसको त्यागने में ही भलाई है lतभी समाज का उद्धार हो सकता हैl



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